Tuesday, February 10, 2009

पैन की जगह कलम व दवात इस्तेमाल करते थे


जीवन संघर्ष क्या होता है? इसके बारे में आज हर कोई नहीं जानता। इसलिए आज जरूरत है बुजुçर्गयत की अहमियत और गरिमा को पहचानने की। बुजुगोZ के चिंतन को समझना होगा और उनकी उपयोगिता को भी। यह बातें तब उजागर हुईं जब बुजुगोZ की कड़ी में 76 वषीüय मोहनलाल घडि़याव से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि समय की सुई तो चलती ही रहेगी और ये जरूरी भी है। आज बहुत कुछ बदल चुका है। बचपन की यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि जब वे तीसरे कक्षा में थे तो कलम, दवात, तख्ती व घर का बना बैग कंधे पर टांगकर स्कूल जाया करते थे, वो दिन कई बार याद आ जाते हैं। आज एक पैन-रजिस्टर की जितनी कीमत हो चुकी है, तब इतने में स्कूल की फीस अदा हो जाती थी। उन्होंने बताया कि तब कई पुलिसकर्मी हॉफ पेंट पहना करते थे, लेकिन आज तो पुलिस अधिकारी-कर्मचारी सभी पेंट पहनते हैं। एक थानेदार और साथ में चार हवलदारों की टोली अकसर बचपन में देखते थे, तो डर जाते थे। तब न तो यातायात के इतने साधन थे और न ही सड़क मार्ग। आज तो वाहनों की कांय-कांय बहुत परेशान करती है। वे बताते हैं कि आज अनावश्यक खर्चाें में जो बढ़ोत्तरी हुई है, वो ही महंगाई बढ़ने का कारण है। बड़े परिवार पालना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुंकिन हो रहा है। यही कारण है कि आज संयुक्त परिवार नजर नहीं आते।

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